Description
‘महिला सशक्तिकरण : नवीन आयाम एवं वैश्विक चुनौतियाँ’ एक संपादित ग्रंथ है, जिसमें महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के समकालीन स्वरूप, संभावनाओं तथा चुनौतियों का विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी, शैक्षणिक और नीतिगत संदर्भों में अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ महिला सशक्तिकरण को केवल अधिकारों और अवसरों तक सीमित न रखते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक स्वतंत्रता, वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, रोजगार, तकनीकी पहुँच, राजनीतिक सहभागिता, नेतृत्व और निर्णय-निर्माण जैसे व्यापक आयामों से जोड़कर देखता है।
पुस्तक में उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की स्थिति, स्थानीय संसाधनों एवं आजीविका के माध्यम से सशक्तिकरण, सूक्ष्म वित्त और महिला उद्यमिता, पुरुष प्रवासन का महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर प्रभाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित रोजगार तथा महिला सशक्तिकरण की बदलती अवधारणाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया है। साथ ही, भारत में नीतिगत हस्तक्षेप, लिंगानुपात, नारी चेतना तथा महिला सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों पर भी विचार प्रस्तुत किए गए हैं।
विभिन्न अकादमिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लेखकों के शोध आलेखों को एक साझा मंच प्रदान करते हुए यह ग्रंथ अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, शिक्षा, विधि, साहित्य तथा नीति-अध्ययन जैसे क्षेत्रों को महिला सशक्तिकरण के व्यापक विमर्श से जोड़ता है। इस प्रकार, पुस्तक एकल दृष्टिकोण के बजाय बहुविषयी परिप्रेक्ष्य के माध्यम से विषय की जटिलताओं और संभावनाओं को समझने का प्रयास करती है।
यह संपादित ग्रंथ शोधार्थियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं तथा सामाजिक क्षेत्र से जुड़े पाठकों के लिए उपयोगी अकादमिक संदर्भ सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण से जुड़े वर्तमान विमर्श को समझने के साथ-साथ नए शोध, विचार-विमर्श और सामाजिक संवाद के लिए आधार प्रदान करना है।

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